बच्चों की सही परवरिश उनका मुस्तक़बिल संवारती है
यहाँ कुछ अहम बातें दी जा रही हैं जो हर वालिदैन के लिए बेहद मुफ़ीद हैं:
1. अच्छे अख़्लाक सिखाएं
बच्चों को अदब, तहेजीब और अख़लाकी इक़दार सिखाएं
उन्हें सदका, अमानतदारी और रहमदिली की एहमियत समझाएं
2. खुलकर गुफ़्तगू करें
रोज़ाना बच्चों से उनके जज़्बात और रोज़मर्रा की सरगर्मियों पर बात करें
उन्हें अपनी राय और सोच के इज़हार का मौक़ा दें
3. तालीम को रुचिकर बनाएं
पढ़ाई को बोझ न बनने दें बल्कि इसे दिलचस्प और लुत्फ़अंदाज़ बनाएं
उनकी कमज़ोरियों को समझकर रहनुमाई करें
4. स्क्रीन टाइम को सीमित रखें
मोबाइल और टीवी के ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल से बचाएं
बच्चों को खेलकूद और तख़्लीकी सरगर्मियों में शामिल करें
5. सेहतमंद ज़िंदगी की आदत डालें
साफ़-सफ़ाई, मुतवाज़न ग़िज़ा और वर्ज़िश को ज़िंदगी का हिस्सा बनाएं
जंक फूड से परहेज़ और सेहत बख्श खुराक को तरजीह दें
6. मोहब्बत से अनुशासन सिखाएं
ग़लतियों पर झल्लाने के बजाय नर्मी से समझाएं
सज़ा देने के बजाय सही और ग़लत का फ़र्क मोहब्बत से बताएं
7. ख़ुदमुख़्तारी सिखाएं
बच्चों को छोटे छोटे काम जैसे बस्ता तैयार करना, चीज़ें संभालना सिखाएं
उनमें फैसले लेने की सलाहियत पैदा करें
8. मोहब्बत और तआवुन दें
उनकी कामयाबी पर सराहना करें और हौसला अफ़ज़ाई करें
उन्हें यक़ीन दिलाएं कि आप हर वक़्त उनके साथ हैं
9 बच्चों को इनाम दें क्योंकि
● एक - उन्हें बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है
● दो - एतिमाद बढ़ता है
● तीन - मुसबत मुकाबले का माहौल बनता है
● चार - पाबंदी और अनुशासन आता है
● पाँच - उस्ताद से ताल्लुक़ मज़बूत होता है
●छह - तालीम में दिलचस्पी बढ़ती है
●सात - उनकी कोशिशों की क़द्र होती है
अच्छी परवरिश से बच्चा ना सिर्फ़ नेक इंसान बनता है बल्कि ज़िंदगी में भी कामयाब होता है
– शेख मोहम्मद सद्दाम
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