महाराष्ट्र के तलबा को मुफ्त दप्तर; 165 करोड़ का खर्च, 45 लाख को सीधा फायदा
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने एक अहम और तालीमी फैसला लिया है कि राज्य की स्थानीय निकायों की स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा पहली से आठवीं तक के तलबा को मुफ्त स्कूल बैग (दप्तर) दिए जाएंगे। इस स्कीम के लिए करीब 165 करोड़ रुपये की रकम मंजूर की गई है, जिससे पूरे राज्य के लगभग 45 लाख तलबा को सीधा फायदा पहुंचेगा।
यह फैसला हक़-ए-तालीम कानून 2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को सामने रखते हुए लिया गया है, ताकि बच्चों के लिए तालीमी माहौल ज्यादा मुनासिब, आसान और खुशगवार बनाया जा सके।
शिक्षा विभाग की जानिब से यह प्रस्ताव भेजा गया था कि करीब 41 लाख से ज्यादा तलबा को दप्तर दिए जाएं, जिसे हुकूमत ने मंजूर कर लिया है। जिन महानगरपालिकाओं में पहले से ही अपने तलबा को दप्तर या उसके बदले रकम दी जाती है, उन्हें इस स्कीम से बाहर रखा जाएगा।
हुकूमत पहले ही मुफ्त किताबें और मिड-डे मील जैसी स्कीमें चला रही है, और अब मुफ्त दप्तर की शुरुआत से गरीब और मध्यम तबके के घरानों को बड़ी राहत मिलेगी। लेकिन इस स्कीम की असली कामयाबी इस बात पर मुनहसिर होगी कि दप्तर की क्वालिटी कैसी होती है और क्या वक्त पर तमाम बच्चों तक पहुंच पाता है या नहीं।
👉 तलबा को क्या फायदा होगा? (Student Benefits):
इस स्कीम से तलबा को स्कूल आने में दिलचस्पी बढ़ेगी, पढ़ाई का बोझ कम होगा और हर बच्चे को जरूरी किताबें, कॉपी और सामान रखने के लिए सही दप्तर मिलेगा। इससे न सिर्फ बच्चों का हौसला बढ़ेगा बल्कि वालिदैन पर पड़ने वाला खर्च भी कम होगा। गरीब घरानों के बच्चों को बराबरी का मौका मिलेगा और ड्रॉपआउट कम होने में मदद मिलेगी।
“यह स्कीम सिर्फ कक्षा पहली से आठवीं तक के तलबा के लिए लागू की गई है।”
यह स्कीम ‘तलबा को तालीमी सामान फराहम करना’ नाम की मौजूदा योजना के तहत ही लागू की जाएगी। दप्तर को भी तालीमी सामान समझा गया है, इसलिए इसका खर्च उसी फंड से किया जाएगा।
दप्तर खरीदने के लिए ई-टेंडर अमल अपनाया जाएगा और उद्योग विभाग के क़वानीन का सख्ती से इत्तेबा किया जाएगा। साथ ही खर्च की पूरी तफसील और उपयोगिता प्रमाणपत्र हुकूमत को देना लाज़मी होगा।

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